म्यांमार में मिलिट्री ने किया तख्तापलट।

 म्यांमार में हुआ सैन्य तख्तापलट। म्यांमार की सरकार को बर्खास्त करते हुए आर्मी ने देश की कमान अपने हाथो में ले ली है। और ये अब विश्व में बहुत बड़ी खबर के रूप में देखि जा रही है। क्योकि डेमोक्रेटिक वर्ल्ड में इस तरह की घटना को बहुत ही सेंसिटिव माना जाता है। दूसरे तरफ म्यांमार की आर्मी का बयान ये है कि म्यांमार में इलेक्शन में धान्द्ली हुई है और उसी


धान्द्ली के विरुद्ध में म्यांमार के गोवेर्मेंट के तख्तापलट कि कार्यवाही कि गयी है। और उनकी तरफ से ये भी बयान दिया जा रहा है कि एक साल तक आर्मी के हाथ में देश का कंट्रोल रहेगा और उसके बाद फिरसे डेमोक्रेटिक प्रोसेस को आगे बढ़ाया जा सकता है। दोस्तों ये तो एक साल बाद ही पता चलेगा की म्यांमार आर्मी क्या चाहती है। पर फिलहाल ये म्यांमार की जनता और सत्ताधारी पार्टी के लिए काफी मुश्किल की घडी है। सुनने को तो ये भी आ रहा है की म्यांमार के अंदर जो सत्ताधारी पार्टी और प्राइममनिस्टर औंग सां सूँ कई है उन्हें भी बंदी बना लिया गया है। ये जो बंदी बनाये गए है और ये किस तरह की बंदिश है , इस बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है।

संभावित उन्हें नज़रबंद या उनके घर में ही बंद रखा गया होगा। पर दोस्तों खाली इतना ही नहीं ,सुनने को तो ये भी आ रहा है की म्यांमार के अंदर नए नियम लागू कर दिए गए है। जिनमे म्यांमार के न्यूज़ एजेंसी को ऑन एयर जाने से भी रोका गया है। फिलहाल खबर ये भी आ रही है की म्यांमार की राजधानी में बड़े बड़े गोवेर्मेंट बिल्डिंग्स और गोवेर्मेंट संस्थानों के सामने आर्मी की तैनाती हो गयी है। और आर्मी चीफ अपने हाथ में एक संस्थाओ का कंट्रोल ले रहा है। दोस्तों म्यांमार के लिए ये कोई पहली घटना नहीं है ,म्यांमार डेमोक्रेसी के बारे के काफी कमज़ोर रहा है और पहले भी इस देश में मिलिट्री शासन रह चुका है। हाल फिलहाल में डेमोक्रेसी को मजबूत किया जा रहा था लेकिन फिरसे ऐसी घटना इसी डेमोक्रेसी को और

कमज़ोर कर सकता है। और म्यांमार के अंदर घाटी ये घटना भारत के लिए चिंता का विषय इस लिए बन सकता है क्योकि भारत एक डेमोक्रेटिक देश है और म्यांमार और भारत का बॉर्डर भी लगता है। और ऐसी स्थिति में चाहे किसी देश का फायदा हो या नुक्सान हो कभी भी कोई डेमोक्रेटिक देश इस तरह की घटना का समर्थन नहीं कर सकता है। और दोस्तों ऐसे ही अमेरिका ने भी इस चीज की निंदा की है। जबकि चाइना जैसा देश इस मोके का फायदा उठा सकता है। दोस्तों आपको जानकारी के लिए बता दु की कभी भी अगर आर्मी द्वारा किसी देश की सत्ता को हत्या लिया जाता है तोह आर्मी का प्रयास ये रहता है की उस सत्ता को रेकग्नाइज़ेशन मिले। और यूरोप और अमेरिका जैसे डेमोक्रेटिक देश तो कभी इसको रेकग्नाइज़ करेगा नहीं बल्कि ऐसा रेकग्नाइज़ेशन तानाशाह देशो से ही मिल सकता है।  जैसा की चाइना। चाइना इस मोके का फायदा उठा कर म्यांमार आर्मी के करीब होने का प्रयास कर सकता है ,जबकि शक तो ये भी है की इसके पीछे चीन का हाथ ही है। हाल फिलहाल में आपने कई खबरों में

सुना होगा की म्यांमार की सरकार द्वारा चाइना के कई सारे फंड को रद्द किया गया है। जिससे चाइना के बेल्ट एंड ऑलडनषेड के ऊपर बहुत बड़ा झटका लगा और चाइना म्यांमार इकोनमी कॉरिडोर जैसे संकल्वय डूबने के कगार पर आ गया था। इसके विपरीत भारत जैसे देशो के इन्वेस्टमेंट और फंडेड प्रोजेक्टों को म्यांमार में ज्यादातर दिया जा रहा था। जिससे चाइना भी काफी परेशान हुआ था। अब देखना ये है की म्यांमार आर्मी ने जो एक साल कार्यभार संभालने का संकल्प लिया है ,उस समय के अंतराल में भारत के किन प्रोजेक्टों पर असर पड़ता है और आने वाले समय में चाइना कितना फायदा उठाने का प्रयास करता है। 

Post a Comment

0 Comments