अपनी साफ़ की हुई गाडी एक दिन के लिए अगर आप अगर बिना ढके बहार छोड़ दोगे तो उसपर इतनी धुल जम जाती है जैसे सालो से उसे साफ़ ना किया गया हो। लेकिन सिर्फ भारत में इतनी ज्यादा धूल आती कहाँ से है। इस चीज़ के बारे में आज हम बात करेंगे।
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भारत में धूल की मात्रा इतनी ज्यादा होने के पीछे कई कारण है ,लेकिन 90 % से भी ज्यादा इसकी जिम्मेदार है हमारी जलवायु और इसके अंदर हमारे देश की अंदरूनी जलवायु भी है और बाहरी देशो की जलवायु भी हमारे देश की धूल को इफ्फेक्ट करता है।
पहले जानते है इंटरनल क्लाइमेट के बारे में
दोस्तों मॉनसून या बरसात के मौसम में काफी ज्यादा साउथ ईस्टन और हमारे अक्षांश पर बेस हुए देशो का ही अभूतपूर्व है।
यानी साउथ ईस्ट एशिया और हमारे अक्षांश पर बसे हुए कुछ देशो को अगर आप छोड़ दोगे तो उसके अलावा पूरे दुनिया में आपको प्रॉपर बरसात का मौसम देखने को नहीं मिलता।
वहाँ पर भी बारिस होती है लेकिन साल में किसी एक स्पेसिफिक महीने जैसे हमारे यहाँ होती है , वो आपको देखने के लिए नहीं मिलती।
वहाँ पर छोटे छोटे
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| Earth |
हिस्सों में कभी भी रेंडमली नार्मल बारिस आपको देखने के लिए मिल जाएगी पूरे साल भर ,जबकि जैसा आप जानते हो इंडिया में जून से लेकर सितम्बर ले महीने तक भी लगातार बराबर बरसात का मौसम रहता है।
मिटटी और धूल बनती है। और जब वो बारिस के मौसम के बाद सुख जाते है तो उनके अंदर कि नमी कम हो जाती है तब वो डस्ट बन जाता है। रैनी सीजन ख़तम होने के बाद में जब पूरबी और पश्चिमी हवाएं देश में सुरु होती है उस समय में यही धूल वातावरण में उड़ने लगती है ,और अलग अलग जगहों पर जाती है।
अब बात करते है कुछ और तथ्यों के बारे में जिसकी वजह से ये फ़ैल इतनी क्यों जाती है।
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| Dust |
क्योकि हमारे यहां पर उत्तर साइड में हिमालय बसा हुआ है ,और पश्चिमी और पूरबी साइड भी काइंड ऑफ़ फनेल जैसा काम करते है
पूरे सेन्ट्रल और नॉर्दन भारत में हवा को रीडायरेक्ट करने के लिए तो मॉनसून सीजन के बाद में ये जो सारी धूल लूज़ हुई पड़ी है वो ऊपर उठ कर अलग अलग भागो में बटना सुरु होती है लेकिन ये भी पूरे के पूरे धूल का जिम्मेदार नहीं है।
यहाँ हम बढ़ते है हमारे बाहरी वातावरण कि तरफ। दोस्तों हज़ारो या लाखो सालो से हर साल
अप्रैल ,मई के महीने में अरब सागर में हमारे देश के अंदर धूल अरब सागर के ऊपर से गुजरते हुए पहुँचती है। यह एक प्राकृतिक प्रितिक्रया है जहा पर मजबूत गर्म हवाओ कि वजह से अरबी देशो कि जो भी धूल होती है वो हमारे देश के अंदर प्रवेश करती है।
इसके अलावा भी अगर बात करे स्पेसली अर्बन एरिया कि शहरी छेत्रो कि तो वहाँ पर धूल
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| Dust |
इतनी ज्यादा क्यों है ,तो वहा पर हम कई चीज़ो को जिम्मेदार ठेरा सकते है इन चीज़ो के अलावा भी।
पहली बात किसी भी निर्माण के नियमो पर ठीक से पालन नहीं करना धूल के कंट्रोल के ऊपर ध्यान नहीं रखना ये भी बहुत बड़ा योगदान करता है।
प्रदूषण , कच्चे रास्ते ,गाड़ियों का मिटटी पर चलना ये साड़ी चीज़े इस धूल में योगदान देती है। और यही चीज़ भारत को डस्टी बनता है।







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