यह है साइबेरिया। रूस। This is Siberia. Russia.

यह है साइबेरिया। रूस

 दुनिया के सबसे बड़े देश का ,सबसे बड़ा हिस्सा ,सर्दियों के दौरान पड़ने वाली कठोर ठण्ड। इनके नाम से ही कपकपी छूट जाती है। खून जमा देने वाली ठंड के साथ साथ अपने अंदर कई राज़ दबाए हुए है। और इस जगह का नाम है साइबेरिया। 

दुनिया के सबसे बड़े देश रूस के उत्तर में स्तिथ भाग को साइबेरिया कहा जाता है। जोकि इस देश का 765 हिस्सा है। रूस की जनसंख्या का लगभग 27% यानि की 3.5 करोड़ लोग साइबेरिया की खून जमा देने वाले ठन्डे इलाके में रहते है। और इस जगह को पृथ्वी का सबसे कम घनत्व वाली जगह भी मना जाता है। 

साइबेरिया के ज्यादातर हिस्से इसके अनुमान के मुताबिक सर्दियाँ काफी कठोर और बेहद ही ठंडी होती है। यहाँ का तापमान सर्दियों में 0° से लेकर 60° नीचे तक चला जाता है। यानी की मंगल ग्रह से भी जयदा ठंडा। अब ज़रा सोचिये जो इलाका मंगल ग्रह से भी ज्यादा ठंडा होगा ,

वह के लोग भला जीवन हकैसे व्यापन करते होंगे। हम बात कर रहे है दुनिया के सबसे ठन्डे गांव ओयमयाकोन की जोकि रूस के


साइबेरिया में स्तिथ है ,जिसे दुनिया की सबसे ठंडी जगह मानी जाती है।

यहाँ जीवन वयापन करने के लिए हर दिन बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते है की यहाँ पर पेन की स्याही तक जम जाती है। कहा जाता है की यहाँ की कोई बैटरी भी काम नहीं करती है ,और यही कारण है की यहाँ पार्किंग में खड़ी गाड़ियां भी हमेशा स्टार्ट मोड़ में रहती है। 

अगर यहाँ कार खड़ी करके उसको बंद कर दिया जाये तो इसका इंजन जम जायेगा। और फिर ये स्टार्ट नहीं होगा। सर्दियों में यहाँ 20 घंटे तक अँधेरा छाया रहता है। जिस वजह से यहाँ पर कोई भी फसल नहीं उगती है। इस लिए यहाँ के लोगो के भोजन का मुख्य श्रोत रेनडियर और घोड़े का मीट है। यहाँ पर रहने वाले लोगो की जिंदगी किसी कठिन चुनौती से कम नहीं है। 

यह बात है 1936 की जब रूस के एक विशेष समुदाय के लोगो को निशाना बना कर हत्या कर दी जाती थी। तब रूस की मुख्य भूमि से पलायन कर लिक्योस के परिवार ने साइबेरिया के जंगलो में पनाह लेना ठीक समझा। 

जोकि बाहरी दुनिया के बिना किसी संपर्क के अपने दम पर 44 वर्ष बिताये। सन 1976 में एक हेलीकॉप्टर की नज़र इनपर पड़ी ,तब जाकर दुनिया के सामने लिक्योस के परिवार की सच्चाई सामने आयी ,जोकि पिछले 44 साल से इन साइबेरिया के जंगलो में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। दुनिया की सबसे हैरतअंगेज घटनाओ में से एक इस घटना की सच्चाई अविश्वसनीय है। 


साइबेरिया ना केवल ठण्ड के मामलो में अनोखा है ,बल्कि इसकी प्राकृतिक खूबसूरती भी दुनिया में और कही भी देखने को नहीं मिलती है। साउथ ईस्ट साइबेरिया में लेक बैकाल दुनिया का सबसे पुराना , सबसे गहरा और दुनिया का सबसे ज्यादा मीठे पानी का भंडार है। साइबेरिया में कई माउंटेन रिंच भी पाए जाते है। और यहाँ के सबसे ऊँचे पर्वत की ऊंचाई 4750 मीटर है। जोकि यहाँ का सक्रिय ज्वालामुखी है।


साथ ही साथ साइबेरिया में कई नदिया भी पायी जाती है। जोकि यहाँ के जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। साइबेरिया स्पेस वैज्ञानिको के लिए भी रोचक जगह रहा है। 

और यहाँ के अतीत में कई ऐसी घटनाये हुई है ,जिन्होंने पूरी दुनिया के वैज्ञानिको को हैरान डाला है। ऐसे ही सबसे प्रशिद्ध घटनाओ में से एक है ,तंगूस्का इवेंट ,यह बात है 30 जून सन 1908 की। तंगूस्का नदी के समीप हर दिन की तरह जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। जंगल के उस हिस्से में रात के जीव जंतु सोने के लिए आये थे ,और दूसरे अपने सुबह का भोजन ढूंढ़ने के लिए निकले ही थे। लेकिन उन प्राणियों को पता नहीं था कि वो सुबह उनकी आखरी सुबह  है।

क्योकि उसी सुबह उस छेत्र में धरती से 8 किलोमीटर ऊपर बहुत ही भयानक विस्फोट हुआ।

जिस वजह से नीचे का हिस्सा तबाह हो गया। यह धमाका इतना बड़ा था कि 2000 वर्ग किलोमीटर तक फैला जंगल के आठ करोड़ पेड़ टूट कर बिखर गए। 

यह हादसा इतना भयानक था कि अगर ये धमाका किस घनी आबादी में होता तो इससे पूरा शहर बर्बाद हो जाता। दरशल वैज्ञानिको का मानना है कि इस धमाके से इतनी ऊर्जा पैदा हुई थी ,कि हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम्ब से 300 गुना जयादा थी। 

कई वैज्ञानिको का तो यह भी मानना है कि यह धमाका इससे भी ज्यादा ताकतवर था ,लेकिन ये धमाका हुआ कैसे। शोधकर्ताओ का मानना है कि उस वक़्त पृथ्वी कि सतह से 8 किलोमीटर ऊपर एक 60 मीटर व्यास वाली एक उल्कापिंड का विस्पोठ हुआ था। 

यह उल्कापिंड वायुमंडल में प्रवेश करते ही वायुमंडल के घर्षण से धरती से 8 किलोमीटर ऊपर ही फट गया। यह विस्फोट इतना भयानक था कि इसकी आवाज़ दूर दूर तक सुनाई दी। यह घटना तमुस्का नदी के आस पास होने कि वजह से इसका नाम तंगूस्का इवेंट कहा जाने लगा। 

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