दोस्तों इस समय भारत में पेट्रोल लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चूका है। हलाकि कुछ शेहरो में इसके दाम कुछ कम या ज्यादा भी हो सकते है। लेकिन औसतन दाम इतना ही है। अब सवाल यहाँ ये आता है कि क्यों पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ते रहते है और क्यों ये एक बार बढ़ जाते है तो कम नहीं होते है। साथ ही साथ इनके दाम तय करने वाला कौन होता है। और इन सब चीज़ो के पीछे असली खेल क्या है।
वो कहावत है ना कि हाथी पलना बहादुरी नहीं है उसे खिलाना बहादुरी है। और ठीक यही चीज़ गाड़ियों के साथ लागु होती है क्योकि हम एक बार पैसा खर्च करके दुपहिया या चारपहिया वाहन खरीद तो लेते है लेकिन उसमे पेट्रोल या डीजल भरवाना काफी बड़ी समस्या हो जाती है। और जिस हिसाब से पेट्रोल का दाम बढ़ रहा है उसे देखकर ये कहने में बिलकुल भी बुराई नहीं है कि आने वाले समय में लोग गाड़ियों को छोड़कर साइकिल से घूमना शरू कर देंगे। हाँ वो बात अलग है कि पेट्रोल के बढ़ते दाम अमीर लोगो कि जेबो पर कोई असर नहीं डालते लेकिन गरीब लोग जो पहले से ही दुर्गम स्तिथि में है उनके लिए इन दामों को देना काफी मुश्किल हो जाता है। तो यह सवाल आता है कि आखिर ये दाम बढ़ते क्यों है। और किस तरह इन सब चीज़ो का निर्णय लिया जाता है।
तो दोस्तों सबसे पहले हम आपको बता दे ये जो पेट्रोल और डीजल है वो हमारे देश में नहीं बनता बल्कि हमे दूसरे देशो से क्रूड आयल इम्पोर्ट करवाना पड़ता है। और दोस्तों ये जो क्रूड आयल है बैरल में आता है। जहा एक बैरल में 159 लीटर क्रूड आयल मौजूद होता है। हलाकि अंतररास्ट्रय बाजार में इस समय एक बैरल क्रूड आयल कि कीमत करीब 45 डॉलर चल रही है। और एक डॉलर लगभग 75 रुपये का है ये बात तो हम सभी जानते है। इस हिसाब से आप अनुमान लगा लो कि ये जो क्रूड आयल है वो तकरीबन 22 रुपये प्रति लीटर कि दर से मिलता है।अब यहाँ आने के बाद क्रूड आयल रिफायंड किया जाता है और उसमे से पेट्रोल अलग निकला जाता है और डीजल अलग निकला जाता है। अब ये 22 रुपये का तेल रिफायंड करने के बाद 30 रुपये का हो जाता है। यानि कि
अब पेट्रोल पूरे 30 रुपये का है। अब आप सोचेंगे कि जब पेट्रोल 30 रुपये का है तो ये हमे इतना महंगा क्यों मिलता है।
तो दोस्तों ये पूरा माज़रा टेक्स का होता है। जी हाँ ,जितना भी आप ये एक्स्ट्रा पैसा देते है ये टेक्स के रूप में देते है। सबसे पहले तोह केंद्र सरकार इसमें से अच्छा खासा टेक्स बटोर लेती है ,फिर तरह तरह के राज्य सरकार अपने हिसाब से पेट्रोल और डीजल में टेक्स लगाती है। यही वजह है कि अलग अलग राज्य में डीजल पेट्रोल के दाम अलग अलग होते है।
अब आप सोच रहे होंगे कि चलो हमारा पैसा टेक्स में जाता है ,टेक्स देना अच्छी बात है क्योकि उससे हमारी रोड और सड़के बनती है। पर अब हम यहाँ पर आपको सरकार का असली खेल
बताते है क्योकि दोस्तों ये जो क्रूड आयल है ना ये 2012 , 2013 में 118 डॉलर प्रति बैरल कि दर से मिलता था। और फिर धीरे धीरे इसके दाम कम होने लगे। लेकिन जब अंतररास्ट्रय बाजार में इस क्रूड आयल के दाम घट रहे थे तो हमारे भारत की सरकार ने टेक्स बढ़ाने सुरु कर दिए जी हाँ इन्होने पेट्रोल के दाम कम करने की बजाये टेक्स बढ़ाने शुरू कर दिए ताकि वो ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सके। अब एक बार जिस चीज़ में टेक्स लगता है तो टेक्स तो कम नहीं हो सकता और यही कारण है कि लगातार पेट्रोल के दाम बढ़ते है क्योकि जब क्रूड आयल के दाम कम थे तभ तो सरकार ने टेक्स बढाकर मुनाफा कमाने कि सोची पर अब जब क्रूड आयल के दाम भी बढ़ रहे है तो सरकार किसी भी तरह से अपना नुक्सान नहीं करवाना चाहती है। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें भला सरकार का किस तरह का नुक्सान ,तो दोस्तों एक व्यापारी के तोर पर सोच कर
देखिये ,कोई चीज़ आप 2 रुपये में खरीद कर 10 रुपये में बेच रहे है उससे आपको 8 रुपये का मुनाफा हो रहा है। लेकिन जब खरीदने वाली चीज़ 5 रुपये कि दर से मिलने लगे तो आप ज्यादा से ज्यादा 1 या 2 रुपये बढ़ा कर ही बेच सकते है। जिसका सीधा मतलब यही है कि आपको नुक्सान होना है। और यही चीज़ सरकार के साथ भी होती है ,यही वजह से अपना नुक्सान बचाने के लिए जनता को लगातार घाटे में दाल दिया जाता है। और पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी होती रहती है।
अब आप माने या ना माने लेकिन हमारे देश में महंगाई बढ़ने का एक बड़ा कारण टेक्स भी है क्योकि चीज़े तो कम लागत में आ जाती है लेकिन उसमे लगने वाले टेक्स से सरकार को भारी मुनाफा होता है। इसी वजह से सरकार अपनी मर्ज़ी से टेक्स लगाती है।
यानि कि साफ़ शब्दों में कहा जाए तो दोस्तों जितनी चीज़ो के दाम बढ़ रहे है उन सबके पीछे का लॉजिक यही है कि उसकी लागत तो महंगी लग ही रही है लेकिन उसमे लगने वाला टेक्स भी एक अहम भूमिका निभाता है। पर इन सब चीज़ो में एक चीज़ सबसे ज्यादा सोचने वाली है कि इतने भारी आबादी वाले देश में जब हर चीज़ पर टेक्स लगता है ,तो लोग हर तरह के टेक्स लगने वाली चीज़े खरीद रहे है तो उससे मिलने वाला पैसा आखिर जा कहाँ रहा है । ये सवाल अपने आप में बहुत बड़ा है।







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